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CHAPTER - 1 , 2 , 3

CHAPTER - 1 (Vo Mar Nahi Jayegi Mere Bina)

शिमला , सिविल हॉस्पिटल ।

इमरजेंसी वार्ड के बाहर खड़ा वो लड़का , डॉक्टर के पास जाते हुए बोला , "मेरी बहन ठीक तो हो जाएगी ना ?"

उसके सवाल को सुन , उस डॉक्टर ने एक नज़र ICU की तरफ देखते हुए कहा , "सुसाइड करने की कोशिश की है उन्होंने । उनका मेंटल ट्रॉमा इस हद तक बढ़ चुका है कि वो खुद की ही जान लेने की कोशिश कर रही हैं । मेरी बात मानिए तो एक अच्छे साइकोलॉजिस्ट या थैरेपिस्ट से उनका ट्रीटमेंट करवाइए , ऐसे तो वो... ऐसे में खुद की ही जान..."

बोलते-बोलते डॉक्टर बीच में ही रुक गए , क्योंकि सामने खड़ा वो लड़का उनको जानलेवा नज़रों से घूर रहा था । उसे ऐसे देख , डॉक्टर वहाँ से जाते हुए बोले , "Take care , मिस्टर खुराना ।"

वो लड़का अभी भी अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिला था , सामने हॉस्पिटल की तरफ खामोशी के साथ बिना पलकें झपकाए देख रहा था , मगर उसके दिल में एक अजीब सी बैचेनी थी ।

वो अपने कदम बढ़ाता हुआ ICU रूम के अंदर चला गया । उसको देखते ही वहाँ खड़ी दोनों नर्स बिना कुछ बोले बाहर आ गईं ।

उन दोनों के वहाँ से जाते ही , वो लड़का , जिसके सामने डॉक्टर भी डर रहे थे अपनी बात पूरी करने से ! वो दोनों नर्स भी उसे देख वहाँ नहीं रुकीं । अब उस बेड पर बेहोशी की हालत में पड़ी उस लड़की के सामने घुटनों के बल बैठा हुआ था ।

वो उसकी तरफ देखते हुए बोला , "जल्दी से ठीक हो जाओ... बस , अब बहुत हो गया , बच्चा ।"

वो इतना ही बोल पाया था कि उसके कानों में किसी के चिल्लाने की आवाज़ पड़ी , जो कि ICU रूम के बाहर से आ रही थी ।

"जितने चाहिए पैसे देने के लिए तैयार हूँ , मगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो ज़िंदा गाड़ दूँगा !"

इसी आवाज़ के साथ अचानक से वो बेड पर पड़ी बेहोश लड़की के हाथों की उंगलियाँ हिलने लगीं ।

ये देख , वो घुटनों के बल बैठा हुआ लड़का खड़ा होते हुए उस लड़की के सिर पर हाथ फेरने लगा और कुछ बोलता , इससे पहले कि एक फीमेल डॉक्टर ने रूम के अंदर आते हुए कहा , "एकांश , हमें पेशेंट को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना पड़ेगा , यहाँ पर दूसरा पेशेंट लाया जा रहा है ।"

उस फीमेल डॉक्टर की बात सुन , वो लड़का , यानी कि जिसका नाम था एकांश , अपनी गर्दन "हाँ" में हिलाता है । कुछ ही देर में उस लड़की को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया और अब ICU में किसी और पेशेंट का ऑपरेशन चल रहा था ।

एकांश सोफे पर बैठा हुआ अभी भी अपनी बहन को देख रहा था । उसकी आँखों में अजीब सी बेबसी थी । तभी वही फीमेल डॉक्टर , जो कि एकांश खुराना को उसके नाम से बुला रही थी , उसके पास आते हुए बोली , "सब कुछ ठीक हो जाएगा , एकांश । तुम फिकर मत करो ।"

उसकी ये बात सुनकर एकांश ने अपना चेहरा उसकी तरफ घुमाते हुए कहा , "कैसे ठीक होगा , मिश्का ? आखिर कैसे ? मेरी बहन पिछले 9 सालों से इस तरह जी रही है जैसे..." बोलते-बोलते वो चुप हो गया ।

तभी वो फीमेल डॉक्टर मिश्का उस लड़की के बेड के पास जाते हुए बोली , "हमारी राहत बहुत स्ट्रॉन्ग है , उसे कुछ नहीं होगा ।" कहते हुए उसने राहत के माथे को हल्के से चूम लिया ।

तभी वहाँ पर एक डरावनी आवाज़ सुनाई दी ।

"विवान ओबेरॉय का बेटा है वो !"

इस आवाज़ को सुनते ही एकांश और मिश्का दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा , साथ ही उनके चेहरे पर हैरानी भी थी ।

वो दोनों वहाँ से बाहर जाने ही वाले थे कि अचानक राहत ने अपनी आँखें खोल दीं और धीरे से बोली , "विवान..."

कुछ देर बाद ।

एकांश के सामने खड़ा वो शख्स , जिसकी वाइट शर्ट लाल हो चुकी थी , साथ ही उस पर खून के धब्बे थे , उसके बाल बिखरे हुए थे और माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं , वो अपने हाथों को मसलता हुआ बेंच पर बैठकर ऑपरेशन रूम की उस रेड लाइट को देख रहा था ।

वहीं , उसके साइड में खड़ा एकांश , जो कब से उसे अपने साथ आने के लिए कह रहा था , मगर वो उसे इग्नोर करता हुआ , उसी जगह पर बैठा ऑपरेशन रूम के दरवाजे को देख रहा था ।

एकांश , उसकी तरफ देखते हुए फिर से बोला , "विवान , प्लीज... विवान , मेरे साथ चलो ।"

हाँ , तो ये है हमारी कहानी का हीरो , विवान रावत । वो अपनी कोल्ड वॉइस में सिर्फ एक शब्द बोला , "कहाँ ?"

उसके सवाल पर , एकांश अपनी रुंवासी आवाज में बोला , "विवान , प्लीज मेरे साथ चलो... मेरी बहन तुमसे मिलने की ज़िद कर रही है ।" कहते हुए वो चुप हो गया ।

विवान के हाथों की मुट्ठियां कस चुकी थीं । वो उसकी तरफ देखते हुए चिल्लाकर बोला , "मेरा 2 साल का मासूम सा बेटा ICU में है और तुम मुझे अपनी बहन से मिलवाना चाहते हो ? Have You Lost Your Mind ? वो मर नहीं जाएगी मेरे बिना !"

फ्लैशबैक ।

राहत के मुंह से विवान का नाम सुनते ही वे दोनों चलते हुए अपनी जगह पर रुक गए और एक साथ मुड़कर उसकी तरफ देखा । राहत अपनी अधखुली आंखों से एकांश की तरफ देख रही थी ।

एकांश और मिश्का , दोनों ही उसके पास गए । वे दोनों में से कोई कुछ भी बोलता , इससे पहले ही राहत रोते हुए धीमी आवाज में बोली , "विवान, भाई... वो यहां हॉस्पिटल में है... उसे दूर से देख लूंगी , पास नहीं जाऊंगी... बस उसकी आवाज सुन लूंगी... नजरें नहीं उठाऊंगी... खुश है ना वो ? उसकी खुशी देखकर आ जाऊंगी... उसकी खुशी देख मैं कुछ दिन और जी पाऊंगी... इतना यकीन करें आप मेरा..." बोलते हुए उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे ।

वो अभी-अभी ही होश में आई थी , जिस वजह से उसके अंदर हिम्मत नहीं बची थी । वो अपनी सांस खींचते हुए ये सारी बातें बोली थी ।

अपनी बहन की ऐसी हालत देखकर , एकांश की आंखों में भी हल्की सी नमी आ चुकी थी । वहीं , मिश्का उसका हाथ पकड़ते हुए कुछ कहती , इससे पहले ही राहत फिर से बेहोशी की हालत में जा चुकी थी , साथ ही उसका हाथ मिश्का के हाथ से फिसल गया ।

मिश्का अपनी आंसू भरी आंखों से खुद के उस हाथ को देख रही थी , जिसमें उसने राहत का हाथ थामा हुआ था ।

एकांश , मिश्का की तरफ देखते हुए बोला , "मैं जा रहा हूं उसके पास ।"

फ्लैश बैक एंड ।

एकांश अपनी जगह पर खड़ा , विवान को देख रहा था । उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अभी-अभी उसने राहत के बारे में क्या कहा है ।

वहीं , एकांश के उसे ऐसे देखने पर , विवान उसकी तरफ कदम बढ़ाता हुआ कुछ बोलता , कि उससे पहले ही वो वहाँ से चला गया ।

विवान को समझ नहीं आया कि क्यों एकांश उसे राहत के पास लेकर जाना चाहता था , मगर उसकी ज़ुबान पर उसकी बहन की बात आते ही उसका चेहरा सख्त ज़रूर हो गया था ।

तभी , ऑपरेशन रूम की वो रेड लाइट , जो कब से ऑन थी , ऑफ हो गई और डॉक्टर बाहर आते हुए विवान के पास जाकर बोले , "आपका बेटा बिल्कुल ठीक है । उसका ऑपरेशन सक्सेसफुली हो चुका है , मगर ध्यान रहे , चोट सर पर लगी है ।" कहते हुए वो वहाँ से चले गए ।

उनके जाते ही , नर्स वहाँ आते हुए विवान की तरफ देखते हुए बोली , "सर , ये कुछ दवाइयाँ हैं , जो नीचे जाकर मेडिकल सेंटर से लानी पड़ेंगी ।" बोलते हुए , वो उस प्रिस्क्रिप्शन पेपर को आगे बढ़ाती , कि विवान की dark eyes देखकर वो दो कदम पीछे हट गई ।

तभी , किसी ने नर्स के हाथों से वो पेपर ले लिया और कहा , "मैं ले आऊँगा ।" इस आवाज़ को सुनते ही , विवान ने देखा तो वो एकांश था । उसे देख , वो कुछ भी नहीं बोला और सीधे उन सबको इग्नोर करता हुआ ऑपरेशन रूम के अंदर चला गया ।

उसने अपनी नज़रें उठाकर देखा , तो एक नन्हा सा 2 साल का बच्चा हॉस्पिटल बेड पर बेजान होकर पड़ा था । उसका वो प्यारा सा , फूला हुआ चेहरा सफेद पड़ चुका था , साथ ही लेफ्ट हैंड में IV लगी हुई थी ।

विवान अपने बेटे को देखता हुआ बोला , "Little Lucifer , जल्दी से ठीक हो जाओ , डैडी तुम्हें सही सलामत देखना चाहते हैं ।" बोलते हुए , वो वहीं बैठ गया ।

करीब 5 मिनट ही हुई थी कि दरवाजा खुलने की आवाज़ उसके कानों में पड़ी । विवान डार्क लहज़े में बोला , "किसकी हिम्मत हुई इस तरह बिना नॉक किए आने की ?" वो इतना ही बोला था कि उसकी नजर एकांश पर पड़ी , जिसके हाथों में दवाइयाँ थीं ।

एकांश ने उन दवाइयों को विवान के हाथों में देते हुए , एक नज़र उसे छोटे से बच्चे को देखा और हल्की सी स्माइल करते हुए पूछा , "क्या नाम है इसका ?"

उसके सवाल को सुन , विवान इमोशन से बोला , "वीरांश ओबेरॉय ।"

एकांश हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोला , "बिलकुल , अपने बाप पर गया है ।" कहते हुए , वो वहां से जाने को हुआ तो उसके कानों में विवान की आवाज़ पड़ी , "रुको !"

उसके इतना कहते ही , वो बिना मुड़े बोला , "बोलो ।"

विवान सवालिया लहज़े में बोला , "तुम हॉस्पिटल में क्या कर रहे हो ?"

एकांश ने वैसे ही कहा , "Nothing important."

उसके जवाब को सुन , विवान कुछ नहीं बोला । तो एकांश सवाल करते हुए बोला , "तुम इंडिया वापिस कब आए ?"

उसके सवाल पर , विवान ने कहा , "3 दिन पहले ।"

उसके जवाब पर , अब की बार एकांश मुड़ा था । वो अपने हाथों की मुट्ठियां कसते हुए , गहरी सांस लेकर बोला , "और तुम्हारी वाइफ क..."

वो इतना ही बोल पाया था कि विवान उसकी बात को बीच में काटते हुए कहा , "शादी के एक साल बाद डाइवोर्स हो गया ।"

एकांश ने जैसे ही ये सुना , उसके हाथों की मुट्ठियां खुल गईं , मगर उसके चेहरे पर नाममात्र भी कोई इमोशन नहीं था । वो कुछ कहना चाहता था , मगर उसकी आवाज़ उसके गले में ही दब चुकी थी ।

तभी उसका फोन बजने लगा । उसने ब्लेज़र से फोन निकालते हुए स्क्रीन पर देखा , तो ये मिश्का का कॉल था । वो अपना कुछ कहे बिना वहां से तेजी से बाहर निकल गया ।

इधर , एकांश सीधे भागकर मिश्का के पास आया था , जो कि राहत के पास बैठी हुई थी । राहत को होश आ चुका था । वो अपनी खुली हुई आँखों से एक टक सीलिंग को देख रही थी ।

एकांश उसके पास बैठते हुए बोला , "क्यों किया तुमने ऐसा ?"

उसके सवाल पर , अब भी वो वैसे ही बैठी हुई थी । उसने एक बार भी एकांश या मिश्का की तरफ नहीं देखा था ।

तभी , मिश्का ने रोते हुए कहा , "कब से बात कर रही हूं , कुछ बोल ही नहीं रही ।"

उसकी बात सुन , एकांश ने राहत का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा , "कुछ तो बोलो , बच्चा !" कहते हुए , वो काफी बेबस हो चुका था ।

राहत उसकी तरफ अपनी नज़रें उठाते हुए देखती है , तो एकांश की आँखों से आंसू बह रहे थे । वो कुछ देर रुककर बोली , "आप उससे मिलकर आए हैं ना ? वो खुश है ना ?"

जारी है !!!

CHAPTER - 2 (Main Ye Shaadi Karungi)

हेलो , गाइस ! मुझे पता नहीं है कि बच्चों के डायलॉग कैसे लिखे जाते हैं , मगर मेरी कहानी के कैरेक्टर के हिसाब से मैंने कोशिश की है । आए , होप आप सब मेरी बात समझेंगे ।

शिमला , सिविल हॉस्पिटल ।

राहत के सवाल पर एकांश ने कुछ भी नहीं कहा । सबके बीच खामोशी छाई हुई थी । वो राहत से कुछ कहता , इससे पहले ही वो बेहोश हो गई ।

एकांश उसे गालों पर थपकियां देता हुआ परेशानी से बोला , "Wake up , bachha ! Open your eyes... क्या हुआ ?"

तभी मिश्का उसे दिलासा देते हुए बोली , "कमजोरी है , रेस्ट करने दो उसे ।"

इधर , विरांश को अभी तक होश नहीं आया था और विवान उसके पास बैठा हुआ लैपटॉप में मेल्स चेक कर रहा था ।

तभी नर्स वहाँ आते हुए बोली , "सर , पेशेंट को जनरल वार्ड में शिफ्ट करने का वक्त आ गया है ।"

उस नर्स की बात सुन विवान ने अपनी गर्दन हिला दी ।

कुछ देर बाद , मिश्का अपने केबिन में बैठी , सामने फाइल में हुई रिपोर्ट्स को देखते हुए अपना मोबाइल उठाकर कॉल लगाते हुए शांत आवाज में बोली , "एकांश , राहत की रिपोर्ट्स आ चुकी हैं ।" बोलते हुए उसने कॉल काट दिया ।

वहीं , एकांश जो राहत के पास बैठा हुआ था , वो उठकर वहाँ से चला गया । उसको और मिश्का को बात करते हुए 15 मिनट गुजर चुके थे ।

इधर , विरांश को भी ICU से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था , मगर विवान वहाँ नहीं था । तभी उसे धीरे-धीरे होश आने लगा । उसकी आँखें पूरी नहीं खुली थीं , मगर उसके सामने खड़े दो बॉडीगार्ड्स ने जैसे ही विरांश को मूवमेंट करते देखा , तुरंत ही विवान को खबर कर दी ।

नन्हे से विरांश को होश आ चुका था । उसकी नज़रें हॉस्पिटल के बेड पर बेहोश पड़ी उस लड़की पर थीं , जिसके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था और हाथ में आईवी फिट थी ।

विरांश , हॉस्पिटल बेड पर बेहोश पड़ी उस लड़की - जो और कोई नहीं , बल्कि राहत थी - की तरफ देखते हुए बोला , "मम्मा... क्या हुआ आपको ?"

वो इतना ही बोला था कि अचानक से राहत के हाथों की उंगलियाँ हिलने लगीं । वहाँ खड़ी मिश्का , जो अभी-अभी वहाँ आई थी , हैरानी से राहत के हाथों की मूवमेंट देख रही थी ।

मगर , एकांश उसके साथ नहीं था । मिश्का के बार-बार कहने पर वो आखिरकार ऑफिस जाने के लिए मान गया था , क्योंकि एक घंटे बाद उसकी बहुत ही ज़्यादा इंपॉर्टेंट मीटिंग होने वाली थी ।

राहत का कोई जवाब ना मिलते देख , विरांश तेज़ आवाज़ में बोला , "मम्मा !"

तभी अचानक से राहत की धड़कनें तेज़ होने लगीं । वहीं , विवान , जो अभी-अभी वहाँ आया था , विरांश की आवाज़ सुनकर अपनी जगह पर बर्फ की तरह जम गया ।

वो कमरे के अंदर आता हुआ सख्त आवाज़ में बोला , "ये आपकी मम्मा नहीं हैं !"

वो इतना ही बोला था कि कमरे में वेंटिलेटर के साइड में रखा मॉनिटर अचानक से शोर करने लगा ।

राहत की धड़कनों की तेज़ होती आवाज़ वहाँ खड़ी मिश्का साफ़-साफ़ सुन पा रही थी । वहीं , विवान , विरांश को अपनी गोद में उठाते हुए सख्त लहजे में दोबारा बोला , "मम्मा नहीं हैं !"

उसकी बात सुन छोटा सा विरांश रोने लगा । उसे यूँ रोते हुए देखकर विवान की आँखें फटी की फटी रह गईं । वो अपने बेटे को देख रहा था , जो आज तक ना कभी रोया था और ना ही मुस्कुराया था ।

वो एक अजनबी लड़की को अपनी माँ कहते हुए आँसू बहा रहा था । विवान , राहत की तरफ देखते हुए बोला , "डैडी... मम्मा !" कहते हुए वो और ज़ोर से रोने लगा ।

तभी राहत की आँखें हल्के से खुल गईं । मिश्का , जो विरांश और राहत को ही देख रही थी , उसके पास आते हुए बोली , "राहत !"

उसी वक्त विवान अपने बेटे विरांश को सीने से लगाता हुआ बोला , "मम्मा नहीं हैं... वो आपको और मुझे छोड़कर जा चुकी हैं । आपके पास आपके डैडी हैं , और वो हमेशा रहेंगे !"

बोलते हुए भी उसकी आवाज़ में कोई इमोशन नहीं था ।

वहीं , उसकी ये बात सुन राहत , जिसे अभी-अभी होश आया था , उसकी बंद आँखों से आँसू गिर गए । साथ ही कमजोरी की वजह से अभी भी उसकी आंखों में धुंधलाहट थी ।

विरांश , विवान को देखता हुआ रुआँसी आवाज़ में बोला , "मम्मा... मम्मा... मम्मा !" कहते हुए उसने अपने छोटे-से हाथ को राहत की तरफ बढ़ा दिया ।

विवान ने जैसे ही उस तरफ देखा - गीली पलकें , पतले से होंठ , छोटी-सी नाक और बेहद खूबसूरत चेहरा , जिसे देखकर कोई भी उसका दीवाना हो जाए…

वो बिना पलक झपकाए , जैसे बिन कहे ही , एक टक राहत की तरफ देख रहा था । तभी आरोही जी ने विरांश को विवान की पकड़ से अपनी गोद में ले लिया ।

तभी वो अपने ख्यालों से बाहर आया । सामने की तरफ देखता हुआ बोला , "आप यहाँ क्या कर रही हैं , मॉम ?"

उसके इस सवाल पर आरोही जी (विवान की माँ) ने कहा , "अपने बेटे के बेटे से मिलने आई हूँ । अब क्या इतना भी हक नहीं है मेरा ?"

उनकी बात पर अब वो कुछ नहीं बोला , तो विरांश ने अपनी धीमी आवाज़ में राहत की तरफ अपनी उंगली पॉइंट करते हुए कहा , "मम्मा..."

आरोही जी , विरांश को समझाते हुए बोलीं , "मैंने कहा था ना , आपकी मम्मा बहुत खूबसूरत होगी... बिल्कुल एंजेल की तरह !" कहते हुए उन्होंने उसके फूले हुए गालों पर आए आँसू टिशू से पोंछ दिए ।

विरांश अभी भी उनकी तरफ देख रहा था , जैसे कहना चाहता हो कि क्या राहत खूबसूरत नहीं है ? मगर वो अब कुछ भी नहीं बोल रहा था ।

विवान वहाँ से तुरंत चला गया , मगर आरोही जी वहीं रहीं । उन्होंने विरांश को अपनी गोद में लेकर , उसके ही बेड पर बैठा दिया ।

राहत की आँखों से आँसू बह रहे थे । ये देखकर मिश्का , जो उसके पास ही खड़ी थी , टेबल पर रखा हुआ टिशू बॉक्स उठाकर उसमें से टिशू निकालते हुए उसके आँसू पोंछने लगी ।

तभी राहत ने धीरे-धीरे आँखें खोल दीं । वो अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क निकालते हुए बोली , "कैसा महसूस हो रहा है तुम्हें अब ?"

उसके सवाल पर राहत ने अपनी पलके झपका दीं । वहीं , साइड वाले बेड पर बैठी हुई आरोही जी अपने सामने खड़े उन बॉडीगार्ड्स को ऑर्डर देते हुए बोलीं , "विरांश के लिए हल्का गर्म दूध ले आओ ।"

उनके ऑर्डर को फॉलो करते हुए एक बॉडीगार्ड वहाँ से चला गया , जबकि दूसरा अभी भी वैसे ही खड़ा रहा । नन्हा सा विरांश अब भी राहत की तरफ ही देख रहा था , मगर अब वो रो नहीं रहा था ।

आरोही जी ने विरांश को देखा , जिसके चेहरे पर छोटी-सी मुस्कान थी । ये देखकर एक पल के लिए तो जैसे उन्हें खुशी के मारे धक्का लगा , मगर फिर उन्होंने अपने एक्सप्रेशंस छुपाते हुए राहत की तरफ देखा ।

मिश्का उसे बैठाने की कोशिश कर रही थी । राहत की आँखों से आँसू अभी भी एक-एक मोती की तरह गाल से सरकते हुए गर्दन पर गिर रहे थे ।

वो उसकी तरफ देखते हुए बोली , "राहत , वो तेरा वहम था !"

मिश्का की बात सुन राहत कुछ भी नहीं बोली और वैसे ही बेड पर टेक लगाए बैठी रही ।

राहत को कुछ भी ना बोलते देख , आरोही जी के चेहरे पर कुछ अनकहे सवाल थे , मगर उन्होंने वो सवाल पूछे नहीं ।

तभी बॉडीगार्ड विरांश के लिए हल्का गर्म दूध लेकर आ गया । आरोही जी ने उस कप को अपने हाथों में लेते हुए विरांश को पिलाने की कोशिश की , मगर नन्हा सा विरांश हर बार अपना चेहरा घुमा लेता ।

ये देख , आरोही जी ने प्यार से कहा , "विरांश…" वो इतना ही बोल पाई थीं कि वो उनकी बात को बीच में काटते हुए बोले , "मम्मा !" कहते हुए , वो राहत की तरफ ही देख रहे थे ।

वहीं , उसके मम्मा कहने पर उसका ध्यान भी अपने आप नन्हे से विरांश पर चला गया । वो उसकी तरफ ही देख रहे थे । राहत को यूं अपनी तरफ देखता पाकर , वो मुस्कुराते हुए बोले , "मम्मा !" बोलकर , उन्होंने अपने दोनों हाथ हवा में फैला दिए ।

ना जाने क्यों , पर नन्हे से विरांश को देख , राहत के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई और उन्होंने भी अपने हाथ आगे बढ़ा दिए , मगर उन दोनों के बेड के बीच फासला था ।

ये देख , आरोही जी , जो कब से राहत की हर एक हरकत को नोटिस कर रही थीं , उनके चेहरे पर भी न दिखने वाली मुस्कान आ गई । उन्होंने विरांश को अपनी गोद में उठाया और राहत को देते हुए बोलीं , "क्या तुम मेरे पोते को दूध पिला सकती हो ?"

उनके सवाल पर , राहत ने अपनी गर्दन हां में हिला दी और उनके हाथों से दूध का कप लेते हुए , विरांश को पिलाने लगी । वो अपनी बड़ी-बड़ी क्यूट क्यूट आंखों से उसे ही देख रहा था ।

वहीं , आरोही जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई और मिशा , जो उसके बगल में ही बैठी हुई थी , उसके दिल में हल्का सा डर आ गया था । क्योंकि उसने अभी-अभी राहत से झूठ बोला था कि वो विवान को इमेजिन कर रही है , मगर उसके एहसास सच्चे थे , वहम नहीं ।

कुछ देर बाद , विरांश ने अपना दूध खत्म कर लिया था और राहत की उंगलियों से खेल रहा था । उसकी मासूमियत देख , राहत के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई ।

उसने प्यार से उसके माथे पर हाथ फेरा , तो वो उसकी तरफ देखते हुए बोला , "मम्मा , आप मेरी मम्मा हो न ?"

उसके इस सवाल पर राहत कुछ बोलती , इससे पहले आरोही जी विरांश की तरफ देखते हुए बोलीं , "विरांश , अब हम घर जाएंगे , आपके डैडी आपका वेट कर रहे हैं , चलिए चलते हैं ," कहते हुए उन्होंने उसे अपनी गोद में उठा लिया ।

उसने अभी भी राहत का हाथ पकड़ा हुआ था । ये देख राहत मुस्कुरा कर धीरे से बोली , "आपके डैडी आपका इंतजार कर रहे हैं ना ? आप उनके पास जाओ , हम बाद में मिलेंगे ," बोलकर उसने उसके माथे को चूम लिया ।

वही विरांश के चेहरे पर , जो अब तक मुस्कुराहट थी , वो कम हो गई । भले ही वो 2 साल का छोटा सा बच्चा था , मगर उसे थोड़ा बहुत तो समझ आ रहा था कि राहत उसे क्या कह रही है ।

इसके बाद आरोही जी विरांश को लेकर वहां से चली गईं । मिश्का , जो सोफे पर बैठी हुई थी , राहत की आवाज सुनकर वो खुशी से उसके पास आते हुए बोली , "राहत... तुम्हारी आवाज... तुमने फिर से बोलना शुरू कर दिया , मैं बहुत ज्यादा खुश हूं तुम्हारे लिए ," कहते हुए वो उसके गले लग गई ।

तभी एकांश वहां पर आ गया । मिश्का और राहत को ऐसे देखकर , उसके चेहरे पर भी हल्के से मुस्कुराहट आ गई । वो राहत के पास बैठा हुआ बोला , "दादा सा और दादी सा चाहते हैं कि तुम्हारी शादी हो जाए , बच्चा , क्या तुम..."

वो ये बोल ही रहा था कि उसकी बात को बीच में काटते हुए राहत बोली , "मैं ये शादी करूंगी ।" कहते हुए उसकी आंखों से आंसू बह गए साथ ही उसके चेहरे पर बेहिसाब दर्द था ।

वहीं उसकी बात सुनकर जैसे मिश्का और एकांश बिना पलके झपकाए हैरानी से उसकी तरफ देखने लगे , जैसे वो आगे उसके बोलने का इंतजार कर रहे हों , मगर वो कुछ भी नहीं बोल रही थी । वो वैसे ही वापस पहले की तरह चुप हो गई थी ।

तभी एकांश फिर से कुछ बोलता कि राहत उसकी तरफ देखते हुए बोली , "लेकिन आप नहीं पूछेंगे कि मैंने क्यों अपनी कलाई काटी ?"

एकांश ने सिर्फ दो शब्दों में कहा , "ठीक है ," और फिर वहां से चला गया ।

उसके वहां से जाने का साफ मतलब था कि वो अभी भी राहत से इस बात से नाराज है कि उसने सुइसाइड करने की कोशिश की थी ।

अगर थोड़ी भी देर हो जाती , तो उसका बचना ज्यादा खून बहने की वजह से शायद नामुमकिन हो जाता , और कोई भी भाई कैसे ये बात मान लेता कि उसकी बहन की ऐसी कोई हरकत करे , और वो उसे बर्दाश्त कर लेता ।

लेकिन इन सब में वो इस बात से भी अच्छी तरह से वाकिफ था की , राहत फिलहाल कितने दर्द में है । और पिछले 9 सालों से वो यही तो देखता आ रहा था ।

मिश्का भी कहीं ना कहीं नाराज सी इस बात को लेकर रहती थी क्योंकि वो भी तो उसकी बचपन की दोस्त थी । आखिर वो अपने दोस्त को ऐसे कैसे खुद के साथ कुछ भी करने दे सकती थी , फिर चाहे वो कितने ही बड़े मेंटल ट्रॉमा से गुजर रही हो ।

मगर अभी इन सारी बातों को साइड में रखते हुए , फिलहाल इस बात से वो खुश थी कि राहत ने अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला लिया है ।

करीब 4 घंटे के बाद…

राजस्थान , लाल हवेली…

राहत का हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होते ही सबसे पहले एकांश , हमेशा , और वो तीनों मेंशन गए थे , और सारा सामान पैक करने के बाद प्राइवेट चार्ट से शिमला से सीधे राजस्थान के लिए निकल गए ।

मिश्का ने हमेशा की तरह सिंपल सी ब्लू कलर की कुर्ती पहनी हुई थी , और उसके ऊपर दुपट्टा डाला हुआ था । वो शादी की तैयारियों में बिजी थी । एकांश पूरी हवेली में हो रहे हर एक काम को देख रहा था ।

वहीं राहत अपने कमरे से बाहर गार्डन एरिया को देख रही थी , तभी उसके कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज उसके कानों में पड़ी । उसने पीछे मुड़कर देखा तो राजीव जी और स्वर्णा जी खड़े थे ।

वो उन दोनों को देखते हुए बोली , "दादा जी , दादी मां , आप ?"

उसके ऐसे बोलने पर , वो दोनों उसके पास आते हुए बोले , "क्यों , हमारी प्रिंसेस नहीं चाहती कि हम उनके कमरे में आए ?"

उन दोनों के एक साथ ऐसे बोलने पर राहत , राजीव जी को गले लगाते हुए धीरे से बोली , "आपकी बहुत याद आ रही थी । पहले ही में पिछले 9 सालों से आपसे दूर थी , पर अब नहीं रहना चाहती । क्या आपको मेरी याद नहीं आई ?"

कहते हुए उसकी आवाज में शिकायत थी । स्वर्णा जी ने उसे वैसे ही गले लगाए हुए कहा , "बहुत याद आ रही थी हमें आपकी प्रिंसेस ।"

इसके आगे वो कुछ बोलती , कि राहत राजीव जी के गले लगते हुए बोली , "और आप ," कहते हुए उसने उनके चश्मे को छुआ । तो वे हंस पड़े और बोले , "हमें भी , मगर आपकी पढ़ाई भी तो जरूरी थी न ।"

उनकी बात पर उसने हां में गर्दन हिला दी । तभी राजीव जी बोले , "प्रिंसेस , आप इस शादी से खुश हैं ना ?"

उनके सवाल पर राहत ने अपनी गर्दन हां में हिला दी , तो स्वर्णा जी बोलीं , "बिना हल्दी और मेंहदी के आपको आज सीधे सात फेरों के साथ विदा करने वाले हैं । क्या आपको कोई एतराज है ?"

उनके एक और सवाल पर राहत ने अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए कहा , "नहीं ।" तो वो फिर से बोलीं , "ये रही आपके होने वाले पति की फोटो ," कहते हुए उन्होंने वो एनवेलप , जो अपने हाथ में पड़ा था , राहत के हाथ में थमा दिया और वो दोनों वहां से चले गए ।

राहत अपने हाथों में पकड़े एनवेलप को देखते हुए बोली...

"कुछ बातें लफ्जों से बयां नहीं होती…

अब आंखें सब कुछ बयां नहीं करती…

उसे अपना कहने का कोई हक नहीं ,

इसीलिए अब ख्वाबों में भी वो मेरा नहीं..."

कहते हुए उसकी आंखों से आंसू कतरा बन बह गए , मगर नजर अभी भी इस एनवेलप पर थी । उसने उस एनवेलप को बिना खोले ही उस सूटकेस में रखा , जिसे वो शादी के बाद अपने साथ ले जाने वाली थी ।

जारी है… !!!

CHAPTER - 3 (Main Viransh Ki Biological Mother Hun)

राजस्थान , अगला दिन , रात का वक़्त…

दुल्हन के जोड़े में बैठी वो लड़की , जिसके चेहरे पर लगाया गया मेकअप फैल चुका था । उसकी आँखों के कोनों पर और गालों पर आँसू साफ़-साफ़ देखे जा सकते थे , मगर वो होश में नहीं थी । वो बेहोशी की हालत में कुर्सी से बंधी हुई थी ।

उसे पहनाया गया हर एक गहना अभी भी वैसे ही था , बस उसकी हालत काफ़ी ख़राब हो चुकी थी । यहाँ तक कि उसका लहंगा भी धूल-मिट्टी की वजह से मैला हो गया था ।

साथ ही वहाँ चार लड़के खड़े उस लड़की की तरफ़ देखते हुए बस एक तरह से मुस्कुरा रहे थे । उनके हाथ में हथियार थे , या यूँ कहें कि दो लड़कों के हाथ में पिस्तौल थी और दूसरे दो लड़कों के हाथ में धारदार चाकू था ।

उनमें से एक लड़का आगे बढ़ते हुए उस लड़की की तरफ़ बढ़ा , तभी सबके कानों में एक आवाज़ पड़ी, "रुको !"

इस आवाज़ को सुनते ही वो लड़का रुक गया । उसने पीछे मुड़कर देखा तो वहाँ एक लड़की खड़ी थी , जिसने पार्टी वेयर ब्लैक कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी , जो उसके थाई तक आ रही थी ।

चेहरे पर भर-भर के मेकअप लगाया हुआ था , गहरी लिपस्टिक और बालों को खुला छोड़ा हुआ था । देखने से तो वो किसी रईस घर से लग रही थी , मगर उसका हुलिया इतना भी अच्छा नहीं था ।

वहीँ , उस लड़की की आवाज़ सुनकर चेयर पर बंधी हुई लड़की की पलकों में हलचल हुई । वो अपनी आँखें खोलने की नाकाम कोशिश कर रही थी , मगर उसकी आँखों से धुंधलाहट जाने का नाम ही नहीं ले रही थी । उसे कुछ भी साफ़-साफ़ नज़र नहीं आ रहा था , मगर सुनाई सब कुछ दे रहा था ।

वो लड़का , उस लड़की को देखते ही उसके पास जाकर बोला , "लेडी बॉस , क्या करना है अब इसके साथ ?"

उसके सवाल को सुनकर वो लड़की ठंडी नज़रों से उसे देखती हुई बोली , "वो मैं तय करूंगी । अब तुम चारों यहाँ से जा सकते हो ।" कहते हुए उसकी नज़र उस लड़की की साइड वाली चेयर पर पड़ी , जो उससे कुछ दूरी पर थी ।

वहाँ पर भी कोई बंधा हुआ था , मगर वो एक छोटा सा बच्चा था । उसकी आँखें खुली हुई थीं , मगर चेहरे पर बिल्कुल भी डर नहीं था । या यूँ कहें कि वो बच्चा एक्सप्रेशनलेस चेहरे से अपने सामने के नज़ारे को देख रहा था , मगर बार-बार उसकी नज़र उस कुर्सी पर बंधी लड़की की तरफ़ ही जा रही थी ।

वो लड़की , उस छोटे से बच्चे के पास आते हुए हल्की मुस्कान के साथ बोली , "क्या हुआ बेटा , अपनी मम्मा को देखकर अच्छा नहीं लगा ?"

उसके मुँह से ये सुनकर , उस छोटे से बच्चे ने अपना मुँह फेर लिया । तो वो लड़की कसकर उसके जबड़े को पकड़ते हुए अपनी तरफ़ उसका चेहरा घुमा कर बोली , "मम्मा कहो , वीरांश… मम्मा !"

बोलते हुए , उसने छोटे से वीरांश के चेहरे पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी , जिससे उसे तकलीफ़ होने लगी ।

उसके चेहरे पर अब भी बिल्कुल डर नहीं था । विरांश , अपने सामने खड़ी उस लड़की को देख , अपना चेहरा घुमा लेता है ।

तो प्रिशा (विवान की ex-wife और विरांश की बायोलॉजिकल मदर) उसके जबड़े को अपनी तरफ घुमाते हुए बोलती है , "एक तुम और तुम्हारा वो बाप..." बोलते-बोलते वो रुक गई ।

फिर पीछे मुड़कर एक लड़के को इशारा करते हुए साइड में पड़ा पानी का जग , उस दुल्हन के जोड़े में कुर्सी से बंधी लड़की पर उड़ेलने का इशारा किया । उस लड़के ने तुरंत उसकी बात मानते हुए वो पानी का भरा हुआ जग उस लड़की पर उड़ेल दिया ।

वो लड़की , जिसे पूरी तरीके से होश भी नहीं आया था , चेहरे पर पानी की मार पड़ने की वजह से उसकी धुंधलाहट एकदम से गायब हो गई । उसे साफ-साफ सब कुछ नज़र आने लगा था ।

वो वैसे ही चिल्लाते हुए बोली , "कौन हो तुम ? और क्यों मुझे यहाँ पर लाया है ?"

उसके ऐसे चिल्लाने पर प्रिशा उसके पास आकर उसकी गर्दन पकड़ते हुए बोली , "मैं विरांश की बायोलॉजिकल मदर हूँ ।"

उसकी बात सुन वो लड़की सवालिया लहजे से बोली , "कौन विरांश ?"

उसके सवाल पर प्रिशा बोली , "मेरे बेटे के साथ 2 घंटे और 17 मिनट गुजारने के बाद भी तुम्हें उसका नाम नहीं पता , राहत ?"

उसके ऐसे बोलने पर जैसे बंदी हुई लड़की चौंकी , रहती ही थी कि उसके दिमाग में उसे छोटे से बच्चे का ख्याल आया , जिसे उसने हॉस्पिटल में दूध पिलाया था ।

उस मोमेंट को याद करते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई , कि उसी वक्त उसका चेहरा दूसरी तरफ झुक गया और उसके होंठ के किनारे से खून बहने लगा , क्योंकि प्रिशा ने अपनी पूरी ताकत से उसे थप्पड़ मारा था । हालाँकि , इतना तेज़ थप्पड़ पड़ने के बाद भी उसके मुँह से हल्की सी सिसकी तक नहीं निकली थी ।

परेशानी से अपना एक हाथ आगे किया , तो उसके पीछे खड़ा वो लड़का , जिसने अपने हाथ में पिस्टल पकड़ी हुई थी , वो उसे दे दी । प्रिशा , पिस्टल को देखते हुए , उन चारों लड़कों को वहाँ से जाने का इशारा करती है , और वो चारों लड़के तुरंत वहाँ से चले जाते हैं ।

प्रिशा , अपने हाथ में पकड़ी हुई पिस्टल को राहत के चेहरे पर घुमाते हुए , उसकी गर्दन तक ले आई थी कि तभी उस कमरे का दरवाजा किसी ने लात मारकर तोड़ दिया ।

इस आवाज़ को सुनते ही प्रिशा बिना पीछे मुड़े ही मुस्कुराने लगी , जैसे उसे पता हो कि वहाँ कौन खड़ा है । वो अभी भी राहत की तरफ देख रही थी । उसने इस मुस्कुराहट के साथ अपने हाथों में पकड़ी पिस्टल सीधे उसके सिर पर दे मारी , साथ ही उसके मुँह से हल्की सी आह निकल गई ।

इसी के साथ राहत के सर से खून बहने लगा । प्रिशा पीछे की तरफ मुड़ी , वहाँ पर और कोई नहीं , बल्कि विवान खड़ा था ।

विवान की नज़र अपने बेटे विरांश पर थी । उसे ऐसी हालत में देखकर उसके माथे की नसें उभर आई थीं , और चेहरा गुस्से से सुर्ख लाल हो चुका था ।

वो विरांश की तरफ अपना एक कदम भी आगे बढ़ाता कि इससे पहले ही प्रिशा बोल पड़ी , "एक कदम भी आगे मत बढ़ाना , विवान !" कहते हुए उसने पिस्टल विरांश की तरफ पॉइंट कर दी ।

वहीं , राहत ने जैसे ही विवान का नाम सुना , उसकी नज़रें खुद-ब-खुद उस दरवाजे की तरफ चली गईं । उसकी हार्टबीट उस एक सेकंड के लिए स्किप हो चुकी थी ।

वो वाकई में उस शख्स को देख रही थी जिसे वो पिछले नौ साल से पागलों की तरह मोहब्बत करती थी । उसके दिमाग में तुरंत एक रील की तरह सब कुछ घूमने लगा। वो हॉस्पिटल में उसके होने का एहसास , उसे उसकी आवाज़ सुनाई देना , सब कुछ ।

उसे समझने में देर नहीं लगी कि विरांश , विवान का ही बेटा है । उसकी आँखों से फिर एक बार आँसुओं का रेला गाल पर से नीचे सरक गया । साथ ही , वो कब से खुद को छुड़वाने के लिए अपनी कलाइयों को बार-बार मरोड़ रही थी । हाथों में कंगन पहने होने की वजह से वहाँ अब शोर हो रहा था ।

मगर उस शोर को वहाँ पर कोई भी नोटिस नहीं कर रहा था । ये देख , राहत और जोर-जोर से अपनी कलाई रगड़ने लगी , जिसकी वजह से वो रस्सी , जिससे उसके हाथों को बाँधा हुआ था , हल्की-हल्की कटने लगी थी । साथ ही , उसकी कलाइयों से खून निकलने लगा था ।

उसकी नज़रें विरांश पर ही टिकी हुई थीं । उसके दिमाग में बस यही बात घूम रही थी कि अगर प्रिशा विरांश की बायोलॉजिकल मदर है , तो वो उसे क्यों मारना चाहती है ?

आख़िर एक माँ अपने ही बच्चे की जान लेने का सोच भी कैसे सकती है , जबकि उसी ने तो उसे ज़िंदगी दी है ? वो इसी उधेड़बुन में , अपनी कलाइयों पर हो रहे दर्द की फ़िक्र किए बिना , अभी भी उन्हें मरोड़ रही थी ।

वहीं , विवान की नज़रें उस पिस्टल पर टिकी हुई थीं । प्रिशा ने अपनी फर्स्ट फिंगर से पिस्टल के ट्रिगर पर रख दिया ।

विवान तुरंत बोला , "क्या चाहिए तुम्हें ?"

उसके सवाल को सुन , प्रिशा तुरंत बोली , "बड़ी जल्दी अकल आ गई तुम्हें !"

उसकी बात सुनकर विवान के माथे की नसें तन चुकी थीं , मगर वो अब भी कुछ नहीं बोला । तो प्रिशा परेशान होकर बोली , "ख़्वाहिश है मेरी तुम्हें तिल-तिल तड़पता हुआ मरते देखने की , वैसे ही जैसे मैं मर रही हूँ ! शान और शौकत के लिए , जो तुमने मुझसे छीनी है !"

इतना बोलते-बोलते उसकी पकड़ ट्रिगर पर कस गई ।

और उसी पल , सबके कानों में गोली चलने की आवाज़ गूंज उठी ।

विवान के मुँह से तुरंत निकला , "विरांश !"

लेकिन जैसे ही उसकी नज़रें उसकी तरफ पड़ीं , वो बिल्कुल ठीक था । ये देखकर वो तुरंत प्रिशा की तरफ देखने लगा ।

प्रिशा के हाथों से वो पिस्टल छूटकर नीचे गिर चुकी थी , और किसी ने उसका वही हाथ पकड़ा हुआ था , जिससे उसने पिस्टल पकड़ी हुई थी ।

हाँ , वो और कोई नहीं , हमारी राहत थी ।

विरांश को सही-सलामत देखकर विवान की जान में जान वापस आ गई । वो तुरंत उसकी तरफ भागता हुआ बढ़ गया ।

जैसे ही राहत को एहसास हुआ कि प्रिशा गोली चलाने वाली है , उसकी रस्सियाँ लगभग उन कंगनों की वजह से कट चुकी थीं । उसने तुरंत कुर्सी से उठते ही प्रिशा का हाथ नीचे की तरफ मोड़ दिया ।

जिस वजह से वो गोली विरांश को न लगकर उसकी कमर से छूकर निकल गई ।

राहत की आँखों से पानी की तरह आँसू बह रहे थे । अपने सामने का ये मंजर देखकर प्रिशा एक पल के लिए घबरा गई और फिर तुरंत राहत के हाथ से अपना हाथ छुड़ाते हुए वहाँ से भाग निकली ।

इधर , राहत अपनी जगह पर खड़ी नहीं रह पा रही थी , क्योंकि उसकी कमर से गोली छूकर निकली थी । लेकिन , उसके मुँह से हल्की सी "आह" तक नहीं निकली ।

उसने मुड़कर विरांश और विवान की तरफ देखा , तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई ।

मगर उसकी आँखों में अब धुंधलाहट छाने लगी थी , और इसी के साथ वो ज़मीन पर गिर गई ।

कमर से गोली छूकर निकलने की वजह से उसे बेतहाशा दर्द महसूस हो रहा था । वो अब धीरे-धीरे कराहने लगी थी ।

उसके कराहने की आवाज़ सुनकर विवान का ध्यान उसकी तरफ चला गया ।

दूसरी तरफ , लाल हवेली…

सुबह का वक्त था । मिश्का , राहत को रेडी करते हुए बोली , "ब्यूटीफुल !"

वही , राहत की आँखें अभी भी बंद थीं । उसने अब तक खुद को आईने में नहीं देखा था । वो अपनी आँखें खोलती , इससे पहले ही मिश्का ने उसके चेहरे पर गहरे लाल रंग का नेट वाला दुपट्टा डाल दिया , जो उसके चेहरे के आगे तक आ गया ।

जिसकी वजह से जब राहत ने अपनी आँखें खोलीं , तो उसे अपना चेहरा आईने में साफ़ नज़र नहीं आ रहा था । उसने वैसे ही मिश्का की तरफ देखा , मगर वो कुछ कहती , इससे पहले ही उसका फोन बजने लगा ।

उसने अपनी फोन स्क्रीन पर देखा , तो "दादी मां" का नाम शो हो रहा था ।

मिश्का बिना वक्त गँवाए अपना फोन पिक करते हुए बोली , "जी , दादी मां !"

दूसरी तरफ से स्वर्णा जी की आवाज़ उसके कानों में पड़ी , "मेरे कमरे में आओ ।"

मिश्का बोली , "आती हूँ ," कहते हुए उसने कॉल कट कर दी और राहत की तरफ देखते हुए बोली , "दादी मां बुला रही हैं , बस अभी आती हूँ ।"

उसकी बात सुन , राहत ने अपनी गर्दन "हाँ" में हिलाई , तो मिश्का तुरंत वहाँ से चली गई ।

राहत अपनी आँखें खोलकर आईने के सामने खुद को देखने लगी । उसका चेहरा तो साफ़ नहीं दिख रहा था , मगर देखने से ही वो काफ़ी खूबसूरत लग रही थी ।

उसकी वो काली , गहरी आँखें , बड़ी-बड़ी पलकें और उनमें काजल लगा हुआ , होठों पर गहरी रेड लिपस्टिक , कानों में झुमके और गले में रॉयल हार पहना हुआ था । वो आज बिल्कुल राजकुमारी की तरह लग रही थी ।

वो खड़े होते हुए जैसे ही मुड़ी , उसकी नज़र सीधे दरवाज़े पर चली गई , जो कि खुला हुआ था । वो दरवाज़े की तरफ़ बढ़कर उसे बंद कर पाती , इससे पहले ही कोई कमरे के अंदर आ गया ।

राहत कुछ बोल पाती , इससे पहले ही उस शख्स ने अपने हाथों में पड़ी हुई पिस्टल को सीधे राहत के सिर पर अपनी पूरी ताकत से मारा , जिस वजह से वो वहीं बेहोश हो गई ।

मगर बेहोश होते हुए भी वो अपने सामने खड़े शख्स को देख रही थी , जो चेहरे पर मास्क और ब्लैक जींस के साथ ब्लैक हुडी पहने हुए था । वो शख्स ऊपर से नीचे तक काले कपड़ों में लिपटा हुआ था ।

वो अपनी धुंधली आँखों से ये सब देख रही थी , इसी के साथ उसकी आँखें बंद हो गईं । तभी उस कंप्यूटर स्क्रीन पर अंधेरा छा गया ।

एकांश , जो कि कंट्रोल रूम में खड़ा उस कंप्यूटर स्क्रीन को देख रहा था , राहत की इस तरह किडनैपिंग होने पर वो अपने पीछे खड़े सारे बॉडीगार्ड्स को घूरता हुआ देखता रह गया ।

वो सभी बॉडीगार्ड्स एक कतार में लाइन बनाकर खड़े थे । साथ ही वहाँ पर राजीव जी भी खड़े थे ।

कुछ ही देर में एकांश और राजीव जी दोनों एक साथ वहाँ से बाहर आ गए । वो जैसे ही हॉल में पहुँचे , स्वर्णा जी बोलीं , "क्या हुआ ? कुछ पता चला ? प्रिंसेस कहाँ है ?"

उनके सवाल पर एकांश ने वो सब कुछ बता दिया , जो वो कंट्रोल रूम में देखकर आया था । इसी के साथ स्वर्णा जी की आँखों से आँसू बहने लगे ।

वो खुद को संभाल नहीं पा रही थीं , तभी मिश्का उन्हें दिलासा देते हुए बोली , "आप फ़िक्र मत कीजिए , दादी माँ । वो मिल जाएगी ।"

वो अभी इतना ही बोली थी कि एकांश का फ़ोन रिंग करने लगा । उसने स्क्रीन पर देखा तो विवान का नाम शो हो रहा था ।

जारी है !!!

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