01

CHAPTER - 1 , 2 , 3

CHAPTER - 1 (One Night Stand)

मुंबई , नाइट बार क्लब…

एक लड़के ने अपने ड्रिंक किए हुए खाली गिलास को घूरते हुए कहा , "वन मोर ड्रिंक ।" उसकी ये सर्द आवाज सुनकर वेटर ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाते हुए उसके गिलास में ड्रिंक डाल दी ।

वो लड़का उस ड्रिंक के गिलास को छूता इससे पहले ही एक लड़की , जिसने थाई तक आने वाली ब्लैक ड्रेस पहनी हुई थी , उस लड़के के पास आकर बोली , "रिशित , दादी मां कॉल आया था , वो तुम्हें घर बुला रही है । अगर तुम ज्यादा ड्रिंक करोगे तो वो गुस्सा करेगी ।"

कहते हुए जैसे ही वो अपना हाथ रिशित की तरफ बढ़ाती , रिशित ने अपना हाथ दिखाते हुए कहा , "डोंट टच मी , दफा हो जाओ यहां से । तुम्हे देख कर मुझे घिन आती है ।" बोलते हुए रिशित ने काउंटर पर पड़े अपने ड्रिंक के गिलास को देखा और एक ही सिप में पूरा पी गया ।

ये बताना मुश्किल था कि उसकी आँखें नशे की वजह से लाल थीं या गुस्से की वजह से । वहीं , उसका गुस्सा देख उस लड़की को घबराहट होने लगी थी , पर फिर भी वो अपनी पूरी हिम्मत जुटाए वहां खड़ी थी ।

रिशित ने अपना चेहरा घुमाया और अभी भी उस लड़की को वहां खड़े देखकर उसने सड़ा सा मुंह बना लिया , जैसे किसी गंदी चीज की वजह से उसे फ्रस्ट्रेशन हो रही हो , और वहां से उठकर क्लब के बाहर चला गया ।

उसके जाते ही वहां खड़ी लड़की के चेहरे पर अब तक जो घबराहट नजर आ रही थी , वो एकदम से गायब हो गई और अब उसके चेहरे पर एक शातिर मुस्कान थी ।

वो उसी मुस्कुराहट के साथ बोली , "बहुत बड़ी गलती कर दी तुमने , रिशित कंधारी... बहुत बड़ी गलती ।" कहते हुए जैसे-जैसे वो बोल रही थी , उसके चेहरे के एक्सप्रेशन्स और भी ज़्यादा तीखे होते जा रहे थे ।

कुछ देर बाद , होटल मून लाइट का शांत और आलीशान माहौल रिशित के कदमों की आवाज से गूंज उठा । वो पूरी तरह से नशे में था , और होश खो चुका था । रिशित खुद को संभालते हुए होटल के रूम की ओर बढ़ा ।

लिफ्ट में पहुंचते ही उसने रूम नंबर देखा , लेकिन नशे में धुत होने की वजह से सही रूम का नंबर याद करना मुश्किल हो गया था । लिफ्ट से बाहर निकलते ही लड़खड़ाते हुए एक कमरे के पास पहुंचा । उसकी आंखें आधी बंद थीं , मगर वो श्योर था की ये उसका ही कमरा है ।

नशे में रिशित ने बिना सोचे-समझे दरवाजा धक्का दिया और अंदर चला गया । कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था , बस हल्की सी चांद की रोशनी बालकनी से से छन कर आ रही थी । वो लड़खड़ाते हुए बेड तक पहुंचता , इससे पहले ही उसकी नजर बालकनी की तरफ गई ।

जहां पर कोई खड़ा था । धुंधली नजरो से देखते हुए उसने सवालिया लहजे से कहा , "ये कौन है ?" कहते हुए रिशित लड़खड़ाते हुए कदमों के साथ बालकनी के पास पहुंच गया ।

उसे अब धुंधली आंखों से वाइट कलर की कुर्ती पहने एक लड़की नजर आ रही थी । अपने रूम में किसी लड़की को देखकर उसका चेहरा सख्त हो गया । वो उस लड़की से कुछ कहता , इससे पहले ही वो लड़की जैसे ही मुड़ी , अपने सामने किसी लड़के को देखकर हैरान रह गई ।

वो कुछ बोलती , इससे पहले ही रिशित ने उसे अपने करीब खींच लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर किस करने लगा । वो लड़की अपनी फटी आंखों से सामने खड़े लड़के को देख रही थी । वो कुछ सोच-समझ पाती , इससे पहले ही रिशित एग्रेसिव होकर उसे किस करने लगा था । धीरे-धीरे वो भी बहकने लगी थी ।

मगर जब रिशित ने उसे खुद से दूर किया , वो लड़की उसे धक्का देते हुए रूम में आ गई । रिशित , जो नशे में था और सब कुछ भूल चुका था , फिर से कमरे में आ गया । उसने लड़की को अपने करीब खींचा और दोबारा उसे एग्रेसिव होकर किस करने लगा ।

वो लड़की रिशित को खुद से दूर करने की कोशिश कर रही थी , मगर जितना वो कोशिश करती , रिशित की पकड़ उसकी कमर पर उतनी ही मजबूत होती जाती थी । आखिरकार , जब वो उससे अलग होकर दूसरी तरफ मुड़ी , तो रिशित ने उसके ड्रेस की जिप खोलते हुए उसकी पीठ पर चूमना और बाइट करना शुरू कर दिया ।

कुछ ही देर में उस लड़की की गहरी ओर तेज सांसों की आवाजे उस रूम में गूंज रही थी । वो अपनी सांसों को कंट्रोल करते हुए बोली , "बस अब और नहीं ।" कहते हुए उसने रिशित की तरफ देखा । मगर उसकी आंखों में एक अलग ही डिजायर नजर आ रही थी ।

अगली सुबह…

रिशित की जब आँख खुली , दोपहर का वक्त हो चुका था । हल्की-हल्की धूप खिड़की से छनकर उसके चेहरे पर पड़ रही थी । उसने अपने सिर को पकड़ते हुए आँखें बंद कर लीं , तभी उसे एहसास हुआ कि उसकी बॉडी पर एक भी कपड़ा नहीं है ।

ये देखकर उसका चेहरा सख्त हो गया । वो झटके से बेड से खड़ा हो गया । उसके सिर में तेज दर्द हो रहा था , मगर जैसे ही उसकी नजर बेडशीट पर पड़ी , उसका सिरदर्द गायब हो गया ।

रिशित ने अपने हाथों की मुट्ठियाँ कसते हुए कहा , "क्या हुआ था कल रात ? मुझे कुछ याद क्यों नहीं आ रहा ?" कहते हुए उसने अपना मोबाइल ढूँढने की कोशिश की , मगर उसे अपना मोबाइल कहीं नजर नहीं आया ।

उसकी नजर बेड के नीचे पड़े हुए अपने ब्लेज़र पर गई । उसने नीचे झुककर उसे उठाया और ब्लेज़र की पॉकेट से अपना फोन निकालकर एक नंबर डायल कर दिया ।

दूसरी तरफ से कोई कुछ कहता , इससे पहले ही उसने सख्त आवाज में कहा , "कल रात मेरे रूम में जो लड़की आई थी , उसकी सारी इनफार्मेशन मुझे इम्मीडिएटली चाहिए । आधे घंटे का वक्त है तुम्हारे पास ," कहते हुए उसने कॉल काट दिया ।

रिशित की नजर बेड पर टिकी हुई थी । वो बिना पलकें झपकाए बस बेड के सिरहाने को देख रहा था , जहाँ कान का एक झुमका पड़ा हुआ था । उस झुमके को देखकर रिशित की आँखों में जैसे खून उतर आया । उसकी आँखें बेहद डरावनी नजर आ रही थीं ।

उसने खुद को शांत करते हुए गहरी सांस ली और सीधा बाथरूम की तरफ बढ़ गया । कुछ देर बाद , बालकनी में खड़ा रिशित सिगरेट के लंबे-लंबे कश ले रहा था । पूरी बालकनी में सिगरेट की स्मैल फैली हुई थी । तभी उसके फोन में मैसेज आने की नोटिफिकेशन गूंजी ।

रिशित ने अपना मोबाइल निकाला और मैसेज खोलकर देखा । स्क्रीन पर एक लड़की की तस्वीर थी , जिसने सफेद अनारकली सूट पहना हुआ था , कानों में झुमके और आँखों में काजल लगाया हुआ था । उसके होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट थी ।

उसकी मुस्कुराहट देख रिशित ने अपनी आधी पी हुई सिगरेट को अंगूठे से बुझाते हुए , उस फोटो के नीचे लिखे नाम को पढ़ा और कहा , "कविरा जोशी... तैयार हो जाओ अपनी बर्बादी के लिए ।"

दूसरी तरफ…

व्हाइट कलर की शानदार और लग्जरियस BMW कार तेज रफ्तार में सीधा एक पेंटहाउस के बाहर जाकर रुकी । उस पेंटहाउस की रेड नेम प्लेट पर गोल्डन कर्सिव राइटिंग में लिखा हुआ था , कविरा जोशी !

हां वो वही थी कविरा जोशी… जो अभी-अभी अपने घर लौटी थी , उसने बड़ी ही नजाकत से अपनी कार का दरवाजा खोला और बाहर निकली । उसका और बहुत ही कनफिडेंट था , उसके होंठों पर वही हल्की मुस्कान थी , और उसकी आँखों में एक अलग ही स्पार्क था ।

तभी उसे देख उसकी सेक्रेटरी मीरा ने कहा, "मैम , आपकी फेवरेट कॉफी बना दूँ ?" जो हमेशा उसके घर पर हर चीज का ध्यान रखती थी ।

कविरा ने अपने दुपट्टे को सही करते हुए कहा, "नहीं , आज मुझे कॉफी नहीं , चाय चाहिए ।"

उसकी बात सुन मीरा ने सर हिलाया और किचन की तरफ बढ़ गई । उसके जाते ही कविरा तुरंत अपने कमरे में चली गई । ओर दरवाजा बंद करते हुए वॉशरूम की तरफ चली गई ।

शॉवर का पानी उसे भीगाता हुआ सरक रहा था । उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बदल भी गए थे । वो लड़की जो वहां खड़ी थी , वो कुछ देर पहले की कविरा नहीं लग रही थी । उसकी आंखों से बहते आंसू पानी के साथ बह रहे थे । मगर उन सुर्ख लाल आंखों में एक अलग ही आग थी ।

कोन थी वो लड़की जिसके साथ रिशित की क्लब में

बहस हुई थी ?

अब क्या करेगा रिशित ?

कौन है कविरा जोशी ?

जारी है !!!

CHAPTER - 2 (Tum Pregnant Ho Kavira)

करीब एक महीने के बाद , पेंटहाउस , सुबह का वक्त ।

कविरा बाथरूम से बाहर आकर आईने के सामने बैठी , अपने बालों पर हेयर ड्रायर चला रही थी । तभी मीरा , उसके कमरे के बाहर आते हुए बोली , "मैं आपका ब्रेकफास्ट रख रही हूँ ।"

उसकी बात सुनकर भी कविरा ने कोई जवाब नहीं दिया , तो मीरा चुपचाप वहाँ से चली गई । मीरा के जाने के बाद , कविरा ने अपने हेयर ड्रायर को ड्रेसिंग टेबल पर रखा और बेड की तरफ जाते हुए अपना लैपटॉप लेकर बैठ गई ।

करीब दो मिनट बाद , उसने लैपटॉप के कीबोर्ड पर अपनी उंगलियाँ चलाना बंद कर दीं । उसके चेहरे पर अब एक शातिर मुस्कान थी । उसके आईपैड की स्क्रीन पर रिशित कंधारी की सारी इनफार्मेशन थी । हाँ , उसने सिर्फ दो ही मिनट में रिशित की सारी इनफार्मेशन हैक कर ली थी ।

वो उस स्क्रीन में रिशित की फोटो को देखते हुए बोली , "बिज़नेस टाइकून , कंधारी एंटरप्राइज़ का मालिक , एरोगेंट , शातिर , रिश्ते जिसके लिए मायने नहीं रखते और इमोशंस की कीमत नहीं... इंटरेस्टिंग !" कहते हुए उसने लैपटॉप को बंद किया और जूस का गिलास हाथों में लेते हुए एक घूंट पिया ।

और तुरंत ही उसने कप वही रखकर वॉशबेसिन की तरफ भाग गई । अभी तो उसने जूस गले से उतारा भी नहीं था , और वो वॉमिटिंग करने लगी थी ।

कुछ देर बाद कविरा ने अपने चेहरे पर पानी के छींटे मारते हुए आईने में खुद को देखा , तो उसका चेहरा सुर्ख लाल था । उसे हल्के हल्के चक्कर भी आ रहे थे और वो कमजोर भी महसूस कर रही थी ।

वो वापस अपने बेड पर जाकर बैठते हुए इंटरकॉम उठाकर कान से लगाते हुए बोली , "मीरा अर्पिता को आने के लिए कह दो ।" कहते हुए उसने बिना मीरा की बात सुने ही कॉल कट कर दिया ।

दूसरी तरफ मीरा , जो किचन में थी और काम कर रही थी , कविरा के ऑर्डर मिलते ही उसके ऑर्डर्स को फॉलो करने लगी । इधर कविरा अपनी आंखें बंद किए , बेड से टेक लगाए बैठी हुई थी ।

लेकिन फिर भी उसे बहुत ही अजीब सा महसूस हो रहा था , मगर वो वैसे ही बैठी रही । करीब आधे घंटे के बाद कविरा के रूम का दरवाजा खुला । रूही , जो पिछले आधे घंटे से एक ही पोजीशन में अपनी आंखें बंद किए हुए बैठी हुई थी ।

दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर उसने अपनी आंखें खोल दीं और देखा तो सामने अर्पिता खड़ी थी । अर्पिता को देखकर उसने हल्की सी स्माइल की , तो अर्पिता उसके चेहरे को देख तुरंत उसके पास आते हुए बोली , "क्या हुआ तुझे ?" कहते हुए उसने उसके माथे को छुआ , जैसे कि चेक कर रही हो कि कविरा को बुखार है या नहीं ।

ओर वो उसके माथे से अपना हाथ हटाते हुए बोली , "बुखार तो नहीं है..." फिर बोलते हुए वो कविरा का चेहरा देखते हुए चुप हो गई ।

वो उसे कुछ पूछती , इससे पहले ही कविरा ने वो सब कुछ कह दिया जो एक महीने पहले उस रात हुआ था और फिर वो चुप हो गई ।

तो अर्पिता सवाल करते हुए बोली , "कौन है वो ?" कहते हुए वो काफी सीरियस लग रही थी ।

वहीं उसकी बात का जवाब देते हुए कविरा बोली , "रिशित कंधारी ।"

ये शब्द जैसे ही उसके मुंह से निकले , अर्पिता की आंखें हैरानी से बड़ी हो गईं । वो कुछ बोलना तो चाहती थी , मगर उसे पूछने के लिए सवाल और शब्द ही नहीं मिल रहे थे ।

तभी कविरा की नजर अर्पिता के हाथों में पकड़े हुए बैग पर गई । वो वहां पर उसका चेकअप करने आई थी । वो इंडिया की सबसे बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर थी और उसकी दोस्त भी । इसी वजह से जब भी कविरा को हेल्थ इशूज होते , वो अर्पिता को ही बुलाती ।

कविरा ने उसके हाथों से वो बैग लेते हुए साइड में रखकर कहा , "मुझे अपना हेल्थ चेकअप करवाना है ," कहते हुए उसने अपना हाथ आगे कर दिया ।

तो अर्पिता ने अपनी गर्दन हां में हिलाते हुए , अपने बैग को खोलकर उसमें से इंजेक्शन निकालते हुए कविरा का ब्लड लेना शुरू कर दिया ।

क्योंकि उसे डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम थी , जिस वजह से वो अपनी हेल्थ का चेकअप करवाती रहती थी । अर्पिता ने उसका ब्लड लेने के बाद उसकी तरफ देखते हुए कहा , "शाम तक रिपोर्ट भिजवा दूंगी । अभी एक सर्जरी के लिए मुझे जाना है ," कहते हुए वो अपना बैग पैक करने लगी ।

उसकी बात सुन कविरा ने अपनी गर्दन हां में हिलाई । तो वो जाते-जाते बोली , "आज के दिन रेस्ट कर लेना । तुम्हारी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही ।"

उसकी इस बात का कविरा अच्छे से मतलब जानती थी कि , वो ये कहना चाहती है कि उसे जो डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम है । उसकी वजह से वो रेस्ट कर ले । मगर इस बात को इग्नोर करते हुए कविरा ने अपनी आंखें बंद कर लीं ।

तभी उसे दरवाजा बंद होने की आवाज सुनाई दी , और उसने अपनी आंखें खोल दीं । वो उसके जाने के बाद वापस लैपटॉप लेकर बैठ गई थी ।

काम करते-करते कब सुबह से दोपहर हो गई , उसे अंदाजा ही नहीं हुआ । जब कविरा ने काम कंप्लीट कर लिया , तो एक नजर अपनी रिस्टवॉच पर डाली ।

उसके चेहरे पर वही नॉर्मल से एक्सप्रेशन थे , क्योंकि ये हर बार का था और उसे काम करते हुए वक्त का पता ही नहीं चलता था । कविरा ने लैपटॉप को साइड में रखा और बंद करते हुए जैसे ही बेड से खड़ी हुई , उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वो धम्म से बेड पर बैठ गई ।

उसके हाथों की मुठ्ठियां कस चुकी थी । वो इतनी कमजोर तो नहीं थी , जितना आज खुद को महसूस कर रही थी । इस वजह से उसे गुस्सा आ रहा था । और इसकी झलक उसके चेहरे से साफ देखी जा सकती थी ।

इधर हॉस्पिटल में अर्पिता ने अपने पेशेंट की सर्जरी कंप्लीट कर ली थी और फिलहाल लैब में कविरा की रिपोर्ट्स के लिए खड़ी थी ।

तभी एक नर्स ने आते हुए उसके हाथों में फाइल थमा दी ।

इधर कविरा अपने कमरे से निकलकर बाहर जाते हुए हॉल तक पहुंची थी , कि फिर मुड़कर मीरा , जो सफाई कर रही थी । उसकी तरफ देखते हुए बोली , "आज का लंच अर्पिता के क्लीनिक भिजवा देना ," कहते हुए वो वहां से चली गई ।

उसकी बात सुनकर मीरा ने अपनी गर्दन हां में हिला दी ।

इधर अर्पिता अपने केबिन में बैठी हुई हैरानी से अपनी आंखें फाड़े , खुद के हाथ में पकड़ी रिपोर्ट्स को देख रही थी ।

तभी एक वार्ड बॉय उसके केबिन में आते हुए बोला , "मैम , लंच ब्रेक हो चुका है ।"

उसकी बात सुन अर्पिता , जिसका ध्यान सिर्फ और सिर्फ रिपोर्ट्स में ही था , उसने कोई जवाब नहीं दिया ।

ये देख वार्ड बॉय फिर से बोला , "मैम , लंच ब्रेक हो चुका है !" इस बार वो काफी तेज आवाज में बोला था ।

उसके इस तरह बोलने पर अर्पिता ने तुरंत उसकी तरफ देखा और बिना कुछ कहे अपनी गर्दन हां में हिला दी । तो वो वहां से चला गया ।

इधर कविरा ने अपनी कार एक क्लीनिक के सामने आकर रोकी ।

वो क्लीनिक ना ज्यादा छोटा था , ना ज्यादा बड़ा । कविरा कार से उतरते हुए क्लीनिक के अंदर चली गई ।

अर्पिता , जो उन रिपोर्ट्स को वापस एनवेलप में रखकर खड़ी होने ही वाली थी कि , तभी उसके केबिन का दरवाजा खुला ।

वो अपना सामान समेटते हुए , बिना सामने देखे बोली , "आज की सारी अपॉइंटमेंट्स कल के लिए ट्रांसफर कर देना , और कोई ज़रूरी हो तो कॉल कर देना ," कहते हुए वो अभी भी अपना सामान समेट रही थी ।

तभी उसके कानों में कविरा की आवाज पड़ी , "लेकिन इतनी जल्दी क्यों ?"

उसकी आवाज सुनकर अर्पिता के हाथ रुक गए । उसने अपना चेहरा उठाकर उसकी तरफ देखा । दरवाजे पर वही खड़ी थी ।

अर्पिता ने सब कुछ वैसे ही छोड़ दिया और कविरा की तरफ बढ़ते हुए , उसका हाथ पकड़कर वहां पर साइड में रखे छोटे से सोफे पर ले जाकर बैठ गई ।

उसके हाथों में अभी भी कविरा की रिपोर्ट्स थीं । वो उन रिपोर्ट्स को उसके हाथों में थमाते हुए बोली , "मैं इसी के लिए मेंशन आने वाली थी ।"

कहते हुए उसका चेहरा काफी स्ट्रेट फॉरवर्ड था ।

मगर कविरा ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और एनवेलप खोलकर उन रिपोर्ट्स को देखने लगी ।

एक पल के लिए तो वो जैसे सब कुछ भूल गई और अर्पिता की तरफ देखते हुए बोली , "मैं कैसे प्रेगनेंट हो सकती हूं ? मेरी तो अभी तक..."

बोलते-बोलते वो बीच में ही रुक गई । उसकी आंखों के सामने उस एक महीने पहले वाली रात का सारा मंजर एक रील की तरह घूम गया ।

ओर उसी के साथ उसका हाथ अपने-आप उसके पेट पर चला गया था । अर्पिता उसकी तरफ़ देखते हुए बोली , "ये सच है , तुम प्रेग्नेंट हो , कविरा । लेकिन अगर तुम चाहो तो इस बच्चे को एबॉर्ट…"

वो इतना ही बोली थी कि कविरा ने कहा , "मुझे सोचने के लिए वक़्त चाहिए ।" कहते हुए वो रिपोर्ट्स लेकर वहाँ से चली गई , और अर्पिता उसे जाते हुए बस देखती रह गई ।

वो क्लीनिक से बाहर आते हुए कार की ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोली , "रिशित कंधारी... तुमने जिस आग से खेला है , उसमें जलना तुम्हारी तक़दीर होगी !" कहते हुए उसकी आँखों से आँसुओं का रेला गाल से सरकते हुए गिर गया ।

क्या होगा आगे ?

क्या कविरा इस बच्चे को एबॉट करेगी ?

क्या होगा आज जब ऋषि को सच्चाई बारे में पता चलेगा ?

जारी है !!!

CHAPTER - 3 (Sign Karo)

मुंबई , दोपहर का वक़्त ।

कविरा कार चलाते हुए मेंशन की तरफ जा रही थी । उसकी नज़रें सामने की तरफ टिकी हुई थीं , उसका दिमाग़ जैसे एक पल के लिए काम करना बंद कर चुका था ।

कार ड्राइव करते हुए भी उसके दिमाग़ में बार-बार रिशित का ही ख़्याल आ रहा था , और जितनी बार उसे उसका ख़्याल आता , उसका ग़ुस्सा बढ़ता ही जाता ।

वो वहाँ से टर्न लेने ही वाली थी कि अचानक उसके सामने एक कार आ गई , जो कि फ़िलहाल कुछ ही दूरी पर नज़र आ रही थी । मगर फिर भी उसने कसकर ब्रेक लगा दिए ।

ब्रेक लगाने के साथ ही रोड के साथ टायर घिसने की आवाज़ वहाँ पर गूंज उठी थी । इसी के साथ , बस कुछ ही इंच पर वे दोनों की कारें एक-दूसरे से दूर थीं ।

कविरा के चेहरे पर घबराहट साफ़-साफ़ नज़र आ रही थी । वो अपने पेट पर हाथ रखते हुए गहरी सांस ले रही थी कि तभी किसी ने उसकी कार का शीशा नॉक किया ।

उसने उस शख़्स को देखा और शीशा नीचे करने की जगह ख़ुद कार से बाहर आ गई । सामने खड़े शख़्स को देखते ही जैसे उसके तन-बदन में आग सी लग गई ।

वो कुछ कहती , इससे पहले ही उस शख़्स ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और अपनी कार की बैक सीट पर उसे वैसे ही गोद में लेकर बैठ गया । और उनकी कार स्टार्ट हो चुकी थी ।

ड्राइवर , जो कि फ्रंट सीट पर बैठा हुआ था , उसने तुरंत बैक सीट का पार्टीशन ऑन कर दिया । ये सब इतनी जल्दी हुआ कि कविरा कुछ बोल ही नहीं पाई ।

वहीं , वो शख़्स जिसकी गोद में वो बैठी हुई थी , जब वो उसे ख़ुद से दूर धकेलने की कोशिश करने लगी , तो इससे पहले ही उस शख़्स ने उसे मजबूती से पकड़ लिया ।

तब वो चिल्ला कर बोली , "कौन हो तुम ? और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे किडनैप करने की ?"

वो इतना ही बोल पाई थी कि वो शख़्स अपने चेहरे से मास्क हटाते हुए बोला , "तुम्हारे होने वाले बच्चे का बाप , रिशित कंधारी ।" कहते हुए उसने अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया ।

रिशित की इस हरकत पर कविरा के पूरे शरीर में गूज़बंप्स आ चुके थे । वो तुरंत ही बोली , "ये मेरा बच्चा है , तुम्हारा नहीं !" कहते हुए उसने उसे ख़ुद से दूर धकेलने की कोशिश की ।

मगर रिशित उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था । वो उसके पेट को हल्के-हल्के से सहलाए जा रहा था । कविरा फिर एक बार कुछ बोलने ही वाली थी कि इससे पहले रिशित बोल पड़ा , "अगर एक और लफ़्ज़ तुम्हारे मुँह से निकला तो..."

वो इतना ही बोल पाया था कि कविरा ने अपना चेहरा फेर लिया , और रिशित चुप हो गया । उसकी बॉडी हल्की-हल्की काँप रही थी । वो इस वक़्त क्या महसूस कर रही थी , वो ख़ुद नहीं जानती थी ।

1 महीने पहले की वो रात… जब नशे में उन दोनों ने एक-दूसरे के साथ रात बिताई थी । और अब , एक महीने बाद , वो उसके बच्चे की माँ बनने वाली थी । जिसके बारे में उसे अभी कुछ ही वक़्त पहले पता चला था । और इस वक़्त , वो ख़ुद उसी इंसान की गोद में बैठी हुई थी ।

करीब आधा घंटा ऐसे ही बीत गया । वो बार-बार अपनी नज़रें झुकाते हुए अपने हाथों में पहनी हुई रिस्ट वॉच पर टाइम देख रही थी कि तभी कार रुक गई ।

वहाँ खड़े बॉडीगार्ड ने आगे आते हुए कार का दरवाज़ा खोल दिया , तो रिशित वैसे ही कविरा को अपनी बाहों में उठाए हुए विला के अंदर जाने लगा ।

कविरा अच्छे से जानती थी कि ये रिशित का ही विला है । आख़िर जानती भी क्यों न हो ? वो एशिया का टॉप बिज़नेसमैन था । वो वैसे ही बोली , "मैं चल सकती हूँ , मुझे नीचे उतारो !"

उसके ऐसे बोलने पर रिशित ने उसे इग्नोर करते हुए वैसे ही अंदर ले जाना जारी रखा । वो ऐसे बिहेव कर रहा था जैसे उसने उसकी कोई बात सुनी ही न हो ।

वही कविरा , जो उसकी बाहों में थी , उसके चेहरे को देख रही थी । ओसियन ब्लू आईज़ , गेहूँआ रंग , पतले से होंठ , लंबी नाक , और बाल , जिनमें उसने रबर बैंड फिट किया हुआ था क्योंकि उसके बाल थोड़े बड़े थे ।

वो बहुत ज़्यादा हैंडसम नज़र आ रहा था । कविरा की नज़रें उसकी जॉ लाइन से होते हुए जैसे ही नीचे की तरफ गईं , वहाँ पर एक अजीब सा टैटू बना हुआ था , जो उसे काफ़ी ज़्यादा डरावना लुक दे रहा था ।

उसकी शर्ट के पहले दो बटन खुले हुए थे , जिस वजह से उसका सीना हल्का-हल्का दिख रहा था । वो उसे बारीकी से नोटिस करते हुए देख रही थी कि तभी उसके कानों में रिशित की आवाज़ पड़ी ।

"मुझे देखना हो गया हो तो पेपर्स साइन कर लो ।"

कहते हुए उसने उसे सोफे पर बैठा दिया ।

उसकी बाद सुनते ही , कविरा बिना उन पेपर्स की तरफ देखते हुए बोली , "मैं ये शादी कभी नहीं करूंगी !" कहते हुए , वो वहां से उठकर जाने लगी ।

इससे पहले ही , रिशित ने कहा , "ये शादी के नहीं , कॉन्ट्रेक्ट पेपर्स हैं , मोहतरमा ! मेरे बच्चे को जन्म देने के बाद तुम्हारा उस पर कोई हक नहीं रहेगा ।"

उसने जैसे ही ये कहा , कविरा , जिसने वहां से जाने के लिए दो या तीन कदम ही बढ़ाए थे , वो अचानक से रुक गई और मुड़कर रिशित की तरफ देखने लगी । उसकी आंखों से आंसुओं की रेला गाल से फिसलकर नीचे गिर गया था ।

रिशित , खड़ा होते हुए , उसके हाथ में पेन देते हुए बोला , "साइन करो !"

तो कविरा , अपने कदम पीछे की तरफ लेते हुए बोली , "कभी नहीं !"

कविरा के ऐसे रिएक्शन पर , रिशित ने उसे अपनी तरफ खींचकर , अपने ब्लेजर में रखी हुई गन को निकालकर , उसके पेट पर पॉइंट करते हुए कहा , "मैंने कहा , साइन करो !"

अबकी बार कविरा के पैरों तले जमीन खिसक गई । वो अपने सामने खड़े शख्स को धुंधली आंखों से देखे जा रही थी । उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे ।

लेकिन जब रिशित ने उसकी तरफ देखा , उसकी नजरों में कुछ ऐसा था कि वो वहीं पर खड़ी खड़ी कांप सी गई और अपने कांपते हाथों से सामने पड़े हुए पेपर्स पर साइन कर दिया ।

अपनी आंखों में आए आंसू को साफ करते हुए , वो बोली , "ये नफरत कभी खत्म नहीं होगी , रिशित कंधारी ! कभी नहीं !" कहते हुए , वो वहां से जाने लगी ।

इससे पहले कि वो आगे बढ़ पाती , रिशित ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया ।

इस बार वो कुछ भी नहीं बोली और अपनी आंखें बंद कर ली । उसकी बंद आंखों से भी आंसू बह रहे थे । रिशित ने बिना उसकी तरफ देखे , सीढ़ियों से ऊपर की तरफ जाते हुए कहा , "जब तक मेरा बच्चा इस दुनिया में आ नहीं जाता , तुम मेरे साथ ही रहोगी और मेरे दिए हर ऑर्डर को फॉलो करोगी ।"

उसके बढ़ते कदम , कविरा के दिल में अजीब सी बेचैनी पैदा कर रहे थे । उसे रिशित के एहसास से घुटन हो रही थी , मगर वो चुपचाप उसकी बातें सुन रही थी ।

रिशित ने अपने पैर से कमरे का दरवाजा खोला और कविरा को बेड पर लिटाते हुए , वहां से चला गया । दरवाजा बंद होने की आवाज कविरा के कानों में पड़ते ही , उसने अपनी आंखें खोल दी । उसकी आंखें सुर्ख लाल हो चुकी थीं । उसकी आंखों के कोनों से बेतहाशा आंसू बह रहे थे ।

वो अपनी दोनों हथेलियां अपने पेट पर रखते हुए बोली , "अभी तो मैं आपको अपना बच्चा भी नहीं कह पाई थी , और आपको मुझसे छीन लिया गया... लेकिन इस सच को कोई नहीं बदल सकता । आप मेरे बच्चे हो और मैं आपकी मम्मा !"

कहते हुए , वो सिसक-सिसक कर रोने लगी ।

दूसरी तरफ अर्पिता , क्लिनिक में बैठी हुई , बस कविरा के बारे में ही सोच रही थी । जब से वो वहां से गई थी , अर्पिता के दिमाग में बस उसी का ख्याल घूम रहा था । आखिरकार , उसने अपना फोन उठाते हुए उसे कॉल लगा ही दिया ।

मगर दूसरी तरफ से कॉल पिक नहीं किया गया , क्योंकि कविरा का फोन तो कार में ही रह गया था , उसके पास फोन था ही नहीं ।

इधर रिशित , अपने लैपटॉप में कविरा के कमरे की फुटेज देख रहा था । लेकिन उसके चेहरे पर बिल्कुल भी एक्सप्रेशंस नहीं थे ।

जारी है !!!

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